Sunday, May 28, 2006

ऐ मेरे चाँद

क्यूँ खफा हैं आज चाँद मेरा
ये उन सितारों को भी मालूम नहीं
क्यूँ रुठा हैं आज इस शाम
ये उन नजा़रों को भी मालूम नहीं

ऐ चाँद तुझे तेरी चाँदनी की कसम
पलको को तो उठा ज़रा
इस हसीन रंगीन शाम
तेरा यार कबसे पीछे खडा

तेरे उन शरबती होंठो की कसम
आज कसूर मेरा न था
तेरी याँद मे ये वक्त कैसे गुज़र गया
ये मझे अबतक मालूम न था

उन झील सी आँखो से हमे यूँ न देख
फिर खो जाने का डर लगता हैं
तेरी उस मासूमियत को हमारी
नज़र लग जाने का डर लगता हैं

ऐ चाँद हमे अपनी बाँहो मे ले ले
अपनी रेश्मी झुलफो के साये मे ले ले
उन मखमली होंठो से तो छू दे
उस नरम मुलायम आगोश मे ले ले

तेरी उन नरगीसी आँखो को चूम कर
तेरी उन शरबती होंठो को पीकर
तेरे उस शरमाने की नजा़कत को देखकर
आज हम मर भी जाऎं, तो हमे गम नहीं

तेरी उन सांसों की गरमी को छू कर
तेरी उन हाथो की नरमी को छू कर
तेरी उन ठंडीसी आहों को भर कर
आज हम मर भी जाऎं, तो हमे गम नहीं

ऐ मेरे चाँद तुझे मेरी कसम
इस दुनिया के उजालो मे कभी खो न जाना
ऐ मेरे चाँद तुझे मेरी कसम
इस दुनिया कि तनहाईयों मे हमे छोड न जाना

ऐ मेरे चाँद खुदा की कसम
तेरी रुह से पहले मेरी जान निकल जाऐ
ऐ मेरे चाँद खुदा की कसम
तेरी फूरकत मे हम कभी शामिल ना हो पायें

ऐ मेरे चाँद तेरी मोहब्बत ही मेरी जिन्दगी हैं
ऐ मेरे चाँद तेरा एहसास ही मेरी दिल्लगी हैं
ऐ मेरे चाँद ये मेरी मोहब्बत,मोहब्बत नहीं
शायद उस खुदा की ही बंदगी हैं,शायद उस खुदा की ही बंदगी हैं...


hello frnds,

This is my first ever romantic poem of my life.i tried hard...lets see u like it or not.Love is beautiful and u can understand it when u r in love.It dosen't matter whether u r in love with u r parents,frnds or grfrnd.but love is love.

Let me tell you abt this beautiful and romantic poem.It's in three phases.
1) how late boyfrnd convinces his grfrnd
2) how he expresses the beauty with his love
3) how important tht person's love in his life

So my dear frnds...if your are late try this poem on your beloved person.And i am sure it will work.And dont forget to tell me ki ---आप के चाँद ने क्या कहा ...
..bcoz मैं तो अभी भी अपने चाँद को उस आसमान मे ढूँढ रहा हूँ.. :-(
लेकिन क्या करे दिखाई नहीं देता और भगवान करे वो जब भी दिखे, वो ईद का चाँद हो.. ;-)

1 comment:

Abhi said...

Excellent work Shrikant. And I am more impressed about your short explanation at the end.

About chand:
I have different issue with it :) "chand" ekach asato aani baghnar anek :) so better go for "chandani", aani "chandani" la "chand" sarkhe grahan nahi lagat or amavasya pan nasate ;)